MD1) भैंस की पूँछ
पानी में हो तो नहीं पकड़ता
पर भैंस की पूँछ मैं भी पकड़ता था
जब मैं बहुत छोटा था तो मेरा दोस्त
भैंस की पूँछ पकड़कर पानी में तैरा करता था
एक दिन पूँछ छूट गई
और वह पानी का हो गया
गाँव की बूढ़ी अम्मा बोली—
"वह कहीं दूसरे किनारे लग गया होगा"
एक दिन देखा कि उन्हें भी पानी में डाला जा रहा है
हार-फूल से सजाकर
उन्हें भी दूसरे किनारे भेजा जा रहा था
अब मैं नदी के पास नहीं जाता
जाता भी हूँ तो पानी में नहीं उतरता
नाव पर तब बैठता हूँ जब वह ज़मीन पर होती है
मैं नदी और नाव का संयोग
नहीं होने दे सकता।
- रवि कुमार जैन
MD2)

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